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क्या ऊपरवाले ने किशोर कुमार जैसे कलाकार बंद कर दिए ?

कहते हैं संगीत का आत्मा से जुड़ाव होता है लेकिन आज उसी संगीत की आत्मा कहां है. गाने ज़ुबान पर चढ़ते हैं और कब उतर जाते हैं पता तक नहीं चलता. कितने ऐसे गाने हैं आज जिनका सिंगर कौन है आपको पता तक नहीं होगा और यही पुराने गानों को उठा लीजिएगा तो एक एक गाने पर किशोर कुमार

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  • Last Updated: August 4, 2017 17:51:29 IST
नई दिल्ली: कहते हैं संगीत का आत्मा से जुड़ाव होता है लेकिन आज उसी संगीत की आत्मा कहां है. गाने ज़ुबान पर चढ़ते हैं और कब उतर जाते हैं पता तक नहीं चलता. कितने ऐसे गाने हैं आज जिनका सिंगर कौन है आपको पता तक नहीं होगा और यही पुराने गानों को उठा लीजिएगा तो एक एक गाने पर किशोर कुमार, रफ़ी, मुकेश या मन्ना डे की मुहर आज भी लगी मिल जाएगी.
 
दरअसल, आज संगीत तो है लेकिन वो किशोर कुमार नहीं है जो उस गीत में, संगीत में आत्मा डालते थे. आज किशोर कुमार की जयंती है औऱ जब हम न्यूज़ रुम में उनकी चर्चा कर रहे थे तो महसूस किया कि जैसे ऊपरवाले ने किशोर कुमार जैसे हरफनमौला कलाकार बनाने ही बंद कर दिए हैं, आवाज़ बहुत हैं लेकिन किशोर नहीं.
 
किशोर की आवाज़ यानि वो आवाज जो देश में दो-दो सुपरस्टार की आवाज बनी. राजेश खन्ना जिन्होंने अपने इंटरव्यू में खुद माना कि किशोर की आवाज की वजह से वो आम हिन्दुस्तानियों के दिल में उतर गए और दूसरे अमिताभ बच्चन. कहते हैं जब मुकद्दर का सिकंदर का वो टाइटल सॉन्ग सिनेमा हॉल में बजता था तो लोग उठकर खड़े हो जाते थे और सीटियां मारते हुए नाचते थे.
 
अमिताभ लोगों के दिल-दिमाग में छाते चले गए. कम लोगों को मालूम होगा किशोर कुमार ने संगीत की विधिवत् कोई शिक्षा नहीं ली लेकिन संगीत की अपनी जिह्वा पर बसाने वाली लता मंगेशकर तक मानती हैं कि दूसरा किशोर मिलना मुश्किल है. किशोर दा के बारे में कहा जाता है कि जब गाना गाने वाले होते थे तो गीतकार, संगीतकार से तो मिलते ही थे, साथ में वो उस एक्टर के बारे में भी जानना चाहते थे और सीन को भी समझते थे जिसपर गाना फिलमाया जाना है और तब जाकर गाने पर हां या ना कहते थे.
 
अगर उन्हें लगता था कि कहे गए सीन में उनकी आवाज फिट बैठेगी. तब वो गले के साथ-साथ मन से गाते थे और इसी वजह से उनकी गायिकी में आपको वेराइटी मिलती है. मतलब अगर दर्द है तो ऐसा कि दिल बैठ जाए. अल्हड़पन है तो ऐसा कि आप गाते-गाते हिलने-डुलने लगें. रोमांस के गाने हैं तो ऐसा कि आप उसे दिल तक उतार लें.
 
आजकल तकनीक का ज़माना है ऐसी मशीनें हैं कि बेसुरा भी सुर में हो जाए. किसी का अनादर करना मकसद नहीं है लेकिन आप खुद देखिए कि उन्हीं मशीनों का सहारा है कि आजकल सलमान भी गा लेते हैं. फरहान अख्तर भी गा लेते हैं और आमिर खान भी. आजकल सिंगिंग की ट्रेनिंग नहीं, मशीन की ट्यूनिंग से काम बन जाता है औऱ इसलिए गाने आते हैं औऱ भाप की तरह ज़हन से उड़ जाते हैं. ऐसा नहीं कि नए सिंगर्स में टैलेंट नहीं है लेकिन वो बात नहीं है, दिल से निकलने वाली वो आवाज़ नहीं है जो किशोर कुमार के पास थी. 
 
सबसे ज्यादा फिल्मफेयर जीतने वाले किशोर दा
किशोर कुमार- 8 
मो. रफी 6 
उदित नारायण- 5 
कुमार शानू – 5 
मुकेश – 04 
महेन्द्र कपूर – 3 
अरिजीत सिंह – 3
 
एक बात साफ़ कर दूं कि अवार्ड जीतना ही दिल जीतने का पैमाना नहीं होता लेकिन 8 बार अवार्ड जीतना भी मामूली बात नहीं होती. आज के दौर के सिंगर्स में कितने ऐसे हैं जो 8-8 बार बेस्ट सिंगर चुन लिए जाएं वो भी बेहतरीन सिंगर्स की पूरी फौज के बीच. दरअसल, गीत-संगीत के लिए कई तरह की आवाजें होती हैं.
 
इंडियन आइडल जो साल 2005 से शुरू हुआ, इसमें अभिजीत सावंत सामने आए. आज कहां हैं कोई नहीं जानता. दूसरी बार संदीप आचार्य सामने आए. वैसे आज वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन तीसरी बार के विजेता थे प्रशांत तमांग चौथी बार के सौरभी देब्बारमा. फिर श्रीरामचंद्र मायनपति, छठी बार में विपुल मेहता और सातवीं बार में एल वी रेवंत कुमार. 
 
इनमें से कितनों के बारे में आपको पता है, कितनों ने अपनी गायिकी अपनी आवाज को आगे भी ऐसे ही बनाए रखा. एक -दो को छोड़कर कोई नहीं. ऐसा शायद इसलिए हुआ कि ऐसे शो अगला किशोर नहीं ढूंढ रहे थे, वो टीआरपी ढूंढते हैं. टीआरपी आती है, पैसा लाती है. शो खत्म, पैसा हजम सिंगर कहां गया किसी को पता नहीं.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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